उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा एक बार फिर शुरू होने जा रही है, लेकिन यात्रा के आरंभ से पहले ही धार्मिक और प्रशासनिक स्तर पर एक नया विवाद सामने आ गया है। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर उठे मुद्दे के बाद अब गंगोत्री और यमुनोत्री धाम से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा अपने अधीन आने वाले धामों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर शपथ पत्र (एफिडेविट) व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है। वहीं, गंगोत्री मंदिर समिति ने इस विषय पर एक अलग रुख अपनाते हुए एक नई धार्मिक व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है।
गंगोत्री में पंचगव्य के बाद ही दर्शन की बात
गंगोत्री मंदिर समिति और चारधाम महापंचायत के पदाधिकारियों के अनुसार, गैर-हिंदुओं के मंदिर प्रवेश को लेकर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है, जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
धार्मिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए समिति ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि गंगोत्री धाम में दर्शन से पहले पंचगव्य ग्रहण की व्यवस्था की जा सकती है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति पंचगव्य स्वीकार करता है, उसे सनातन परंपरा में आस्था रखने वाला माना जा सकता है।
क्या है पंचगव्य और इसकी मान्यता
पंचगव्य हिंदू परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह गाय से प्राप्त पाँच तत्वों—दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर—का मिश्रण होता है। कई धार्मिक अनुष्ठानों में इसका उपयोग शुद्धिकरण के लिए किया जाता है। आयुर्वेद और जैविक खेती में भी इसे उपयोगी माना गया है।
धार्मिक और सामाजिक बहस तेज
गंगोत्री मंदिर समिति के कुछ पदाधिकारियों ने यह भी कहा है कि जो लोग गाय को पूजनीय मानते हैं और पंचगव्य का आचमन करते हैं, उन्हें सनातन परंपरा से जुड़ा माना जा सकता है। इस बयान के बाद “घर वापसी” जैसे मुद्दों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
यमुनोत्री में जल्द होगा निर्णय
दूसरी ओर, यमुनोत्री मंदिर समिति ने भी इस विषय पर सहमति जताई है कि गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए। इस संबंध में अंतिम निर्णय एक विशेष धार्मिक अवसर पर लिया जाएगा, जिसमें कपाट खुलने की तिथि और प्रवेश नियमों की घोषणा भी की जाएगी।
राजनीतिक हलचल भी तेज
चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से प्रस्तावित है, जो उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है। ऐसे में इस मुद्दे ने राजनीतिक माहौल भी गरमा दिया है। विपक्षी दल जहां सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार की ओर से इस विषय पर स्पष्टीकरण दिया जा रहा है।











