चमोली जिले के नारायणबगड़ क्षेत्र की पिंडर घाटी के दूरस्थ गांव से आने वाले युवा योगेश बिष्ट इन दिनों देहरादून में रहकर पढ़ाई के साथ-साथ एक प्रेरणादायक पहल चला रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने युवाओं को किताबों से जोड़ने के उद्देश्य से “किताब वाला दोस्त” नाम से अभियान शुरू किया है।

रविवार के दिन योगेश देहरादून के विभिन्न चौराहों और सड़क किनारे किताबों के साथ बैठकर युवाओं को उपन्यास, कहानियां और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी कोशिश है कि अधिक से अधिक युवा मोबाइल और सोशल मीडिया से बाहर निकलकर पढ़ने की आदत विकसित करें।
योगेश बिष्ट ने बताया कि उन्होंने अपनी इस पहल में ऐसी किताबों को जोड़ा है जो जीवन के विभिन्न विषयों को संजोती हैं और युवाओं को सही दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करती हैं। उनका कहना है कि आज के टेक्नालजी के दौर में अधिकांश युवा अपना समय मोबाइल पर व्यतीत कर रहे हैं, जिससे पढ़ने की आदत धीरे-धीरे कम होती जा रही है। ऐसे समय में जरूरी है कि युवाओं को फिर से किताबों की ओर लाया जाए, ताकि उनका ज्ञान बढ़े और सोच मजबूत बने।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कोई व्यवसाय करना नहीं, बल्कि पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है। योगेश की इस पहल को देखने वाले लोग भी इसे सराह रहे हैं और कई युवा उनके पास आकर किताबें ले रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के प्रयास समाज के लिए प्रेरणा हैं और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने में सहायक हो सकते हैं।











